बग़ीचे में गुमने वाला भूत Real Ghost Hindi Story Kahani

बग़ीचे में गुमने वाला भूत Real Ghost Hindi Story Kahani

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Real Ghost in Gardan Hindi Kahani

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भूत-प्रेत के किस्से सुनने में बेहद रोमांचक और दिलचस्प लगते हे लेकिन क्या हो जब ये किस्से सिर्फ किस्से न रहकर एक हकीकत की तरह आपके सामने आए? आज की युवा पीढ़ी भूत और आत्मा के होने पर विश्वास नहीं करती लेकिन जिस पर आप विश्वास नहीं करते वह असल में हैं ही नहीं यह तो संभव नहीं हैं . आज हम ऐसे ही भूत स्थान से आपका परिचय करवाने जा रहे हैं । आज में आपको ऐसी कहानी सुनने जा रहा के आप सुनते ही आपके रोंगटे खड़े जो जायेंगे ।

और यह कहानी सच्ची हैं और आपको इस कहानी को सुनने के बाद बेहद कुच सिख मिलेंगी इस लिए आप इस कहानी को मन लगाकर पढ़ना । में आपका ज्यादा वक्त बर्बाद ना करते हुए अपनी कहानी पर अत हु । हेलो दोस्तों मेरा नाम राज है । में ८ वी कक्षा में पढ़ाई कर था । बात तब की हैं जब में ९ – १० साल का था । गर्मिओं की छुट्टिया थी । में अपने गाँव गया हुआ था । मेरा गाँव का नाम उपेरा है । हम गर्मियों की छुट्टियों में अक़सर गाँव जाया करते थे । क्योंकि की गाँव में मौज मस्ती के आलावा कोई काम नहीं होता था । शहर में वो आज़ादी नहीं मिलती थी जो गाँव में थी । हमारा गाँव बहुत बड़ा नहीं था लेकिन बहुत अच्छा था । हमारे गाँव की बात ही कुछ और थी हमारा गाँव मानो स्वर्ग से भी अच्छा हो ।

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हमारे गाँव से लगभग आधा किलोमीटर पर एक बहुत बड़ा बगीचा हैं जिसको हमारे गाँव वाले बारी नाम से पुकारते है । यह लगभग १२-१५ एकड़ में फैला हुआ है । इस बगीचे में आम और महुआ के पेड़ो की अधिकता है । बहुत सारे पेड़ो के कट या गिर जाने के कारण आज यह बड़की बारी अपना पहलेवाला अस्तित्व खो चुकी है पर आज भी कमजोर दिलवाले व्यक्ति दोपहर या दिन डूबने के बाद इस बड़की बारी की ओर जाने की बात तो दूर इस का नाम उनके जेहन में आते ही उनके रोंगटे खड़े हो जाते है । आखिर क्यों? उस बड़की बारी में ऐसा क्या है? जी हाँ, तो आप आज इस कहानी को सुनोगे तो आपके भी रोंगटे खड़े हो जायेंगे। तो आज से ३०-३२ साल पहले यह बड़की बारी घनी ओर भयावह हुआ करती थी । दोपहर के समय भी इस बड़की बारी में अँधेरा और भूतों का खौफ छाया रहता था ।

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इस लिए वह पर कोई नहीं जाता था। लोग आम तोड़ने या महुआ लेने के लिए दिल बांधकर बड़की बारी में जाया करते थे। हाँ इक्के – दुक्के हिम्मती लोग जिन्हे हनुमानजी पर पूरा भरोसा हुआ करता था वे कभी कभी अकेले भी जाते थे । कुछ लोगों का तो यह भी कहना है कि रात को भूत-प्रेतों को यहाँ चिक्का – कबड्डी खेलते हुए देखा जा सकता है । अगर कोई व्यक्ति भुला – भटक कर इस बरी के -आस-पास भी पहुँच गया तो ये भूत उसे भी पकड़कर अपने साथ खेलने के लिए मजबूर करते थे और ना नुकुर करने पर जमकर धुनाई कर देते थे । और उस व्यक्ति को तब छोड़ते थे जब वह काबुल करता था कि वह भाँग-गाँजा आदि उन लोगों को भेट करेंगा। तो आइए उस बगीचे कि एक सच्ची घटना सुनाकर आपके रोंगटे खड़े कर लेता हूँ । उस बगीचे में मेरे भी बहुत सरे पेड़ हुआ करते थे ।

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एकबार हमारे दादाजी ने आम के मौसम में आमों की रखवारी का जिम्मा गाँव के ही एक व्यक्ति को दे दी थी। लेकिन कहीं से दादाजी को पता चला की वह रखवार ही रात को एक – दो लोगो के साथ मिलकर आम तोड़ लेता है। तो एक दिन हमारे दादाजी ने छिपकर सही और गलत का पता लगाने को सोचा । दादाजी रत को खा – पीकर एक लाठी और बैटरी लेकर हमारे दादाजी उस भयानक और भूतो के साम्राजय वाले बरी में पहुंच गए । बगीचा एक दम सुमसान था वह मेरे दादाजी ऐकले थे और उनको कोनेवाला पेड़ के नीचे एक व्यक्ति दिखाई दिया । दादाजी को लगा की यही वो व्यक्ति है जो आम तोड़ लेता है । दादाजी ने आव देखा ना ताव; और उस व्यक्ति को पकड़ने के लिए लगे दौड़ने । वह व्यक्ति भाग ने लगा । दादाजी उस व्यक्ति को पकड़ के लिए उनके पीछे दौड़ रहे थे और चिल्ला रहे थे कि आज तुमको पकड़ कर ही रहूँगा । भाग ; देखता हु कि कितना भागता है ।

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अचानक ऐसा हुआ के वो व्यक्ति उस बारी में ही एक पेड़ के पास पहुंच कर भयंकर और विकराल रूप में आ गया। उसके अगल – बगल में आग उठने लगी । अब तो हमारे दादाजी काठ हो गए और बुद्धि ने काम करना बंद कर दिया । उनका शरीर कांपने लगा , रोएँ खड़े हो गए और वो एक दम अवाक हो गए । अब उनकी हिम्मंत जवाब देते ही जा रही थी और उनके पैर ना आगे जा रहे थे न पीछे । लगभग २-३ मिनिट बेसुध खड़ा रहने के बाद थोड़ी सी हिम्मंत करके हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए वे धीरे – धीरे पीछे हटने लगे ।

जब वे घर पहुँचे तो उनके शरीर से आग निकल रही थी। वे बहुत ही सहमे हुय्र थे । ३-४ दिन तो ऐसे ही बिस्टेर पर पड़े रहे थे । कुच ना खाते ना पीते थे और कुच बोलते भी नहीं थे उनको बहुत बड़ा सदमा लग गया था । और डरे डरे रहते थे । और उनको तो बस ऐसा ही था के बरीवाला भूत मुझे नहीं छोड़ेगा । उनके विचार में बस वो भूत ही दिखाई देता था ।

उस साल से हमारे दादाजी ने फिर अकेले उस बड़की बारी कि और न जाने कि कसम खा ली । दोस्तों आशा करता हु की मेरी ये कहानी आपको जरूर पसंद आयी होगी दोस्तों हमें कोमेंट करके जरूर बताये । और आपके पास कोई स्टोरी है तो हमें जरूर कमेंट या शेयर करे आपकी स्टोरी हम अपनी साइट पे शेयर करेंगे । आपने हमारी स्टोरी पढ़ ने लिए आपका बहोत बहोत धन्यवाद ।

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