Pret Atma Ka Upkar Aur Dhongi Baba Real Ghost Stories in Hindi

Pret Atma (भूत ) Ka Upkar Aur Dhongi Baba | Real Ghost Stories in Hindi

Posted by

Real Ghost Stories in Hindi Kahani

  • pret atma aur baba real ghost story hindi kahani
  • Hindi Horror Stories
  • Real Ghost Horror Stories
  • Most Haunted Places in India
  • Hindi Story Ghost
  • Pani me Rahne Wali Bhoot Ka Upkar
  • Pret Atma Aur Dhongi Baba ki Kahani

Pani me Rahne Wali Atma Ka Upkar Aur Dhongi Baba

दोस्तों भूत प्रेत से सम्बंधितना घटनाओ मैं ज्यादातर रोंगटे खड़ी कर देती है । तो कुछ इतनी मार्मिक होती है की दिल भर जाता है। आपको मैं ऐसी कहानी सुनाने जा रहा हु की आप सुनते ही आपके रोंगटे खड़े हो जायेंगे। दोस्तों ये कहानी मेरे छोटे से गाँव रतनपुर की है।

दोस्तों ये कहानी सन २०१५ की १४ जून की है जब में अपने गांव मैं शूटिया मनाने गया था। दोस्तों मैं आपका ज्यादा टाइम बर्बाद न करते हुए इस कहानी शेर करने जा रहा हू। सब कुछ सामान्य था उस दिन । सावन का महीना था रविवार का दिन था , बारिश नहीं हो रही थी मगर मौसम अच्छा था। कोई आराम कर रहा था तो कोई पड़ोसिया के साथ अपने पुरे हप्ते के अनुभव की चर्चा कर रहा था। मैं भी सुभह उठ कर नास्ता पानी करके टीवी देख रहा था । तभी कॉलोनी मैं जैसे हाहाकार सा मच गया । पूरा इलाका घर से बार आ गया था, पूरी कॉलोनी मैं रोने की चिल्लाने की आवाज गुजने लगी थी । मेने उसी भीड़ मैं शामिल अपने एक दोस्त से इस हंगामे का कारन पूछा तो मेरे भी होस उड़ गये । हुआ ये था के हमारे करीब कुछ दूर पर एक परिवार रहा करता था, परिवार के मुखिया उपाध्ययाय जी अच्छे आचरण वाले और समध्रा वय्क्ति थे। उनके चार बेटे थे, रविवार का समय पाकर उपाध्या जी के ३ बेटे गंगा किनारे अपने २ दोस्तों के साथ उस सुहाने दिन के मजे लेने गए थे । जाने वह क्या हुआ क्या घटना घटी ये किसी को नहीं पता था, मगर उन ५ मै से ४ वही दुब गए और सिर्फ एक जो की नदी में उतरा ही नहीं था डरा हुआ वापस आया और उनके घर वालो को घटना की जानकारी दी । जो कुछ भी उसने बताया उस पर विश्वासी बहोत ही करना मुश्किल था ।

हाँ वह जो कुछ भी हुआ था उस लड़के के मुताबिक वो चारो दुब चुके थे । पुलिस बुलाई गयी रिपोर्ट हुई और फिर छानबीन सुरु हो गयी । उपाध्या जी काफी पहुँच वाले आदमी थे इसलिए पुलिस बिना नतीजे शांत नहीं बेठ सकती थी । पुरे दिन पुलिस ने छानबीन जारी रखी । जिस घाट के पास वो लोग नहाने गए थे उस घाट से २ किलोमीटर दूर तक पुलिस के गोताखोरों ने लाशों को तलाश किया परंतु उनके हाथ कुछ भी नहीं लगा। पुलिस की नींद उड़ गयी और उधर उपाध्ययाय परिवार में शोक के साथ एक उमींद भी आ गयी के शायद कुछ अनर्थ न हुआ हो । सब एक आशा के साथ उन लोगो के लोट आने की उमींद में कुछ न कुछ प्रयास में लगे हुए थे । पुलिस ने उनके बचे हुए दोस्तों को हिरासत में लेकर पूछताछ करना सुरु किया । लेकिन पुलिस उस लड़के ने जो जो बताया वो सेकड़ो लोगो के सामने कल ही बया कर चूका था । उसने बताया था की वो ५ कल सुना मौसम देख केर गंगा के घाट के पर गए थे वहा उन लोके ने बैठ कर पहले काफी बातें की फिर उसके बाद घाट से गंगा के किनारे दूसरी तरफ चल दिए । वहा पर काफी शांति थी इस लिए ५ ने वही डेरा जमा लिया । फिर उनमे से चारो ने तय किया के इसे कुछ मजा नहीं आ रहा था थोड़ी बियर या शराब होती तो ज्यादा मजा आता। फिर उनमे से एक ने जाकर दो बोतल और कुछ गिलास का इन्तिजाम कर लिया । लेकिन वो पिता नहीं था उस लिए उसने उन चारो का साथ देने से मना कर दिया । वो शराब पि रहे थे और अपने अपने हप्ते भर की बातों कर रहे थे , जैसे जैसे उनकी शराब ख़तम हो रही थी वहा का माहौल शांत और शांत होता जा रहा था ।

कुछ देर वहा पानी के सिवा पेड़ पल्लों मे भी हलचल होना बंध हो गयी। उसने सोचा शायद आंधी तूफान आने वाला है उसने उन चारो को वापस चलने को कहा मगर वो चारो मिलकर ४ बोतल गटक चुके थे। उन्होंने सोचा अगर इसी हालत में घर गए तो बहोत जूते पड़ेगे इस लिए सोचा की थोड़ा सा पानी में नहा लिया जाय ताकि नासा कम हो जाये और फिर अपने अपने घर चलेंगे। फिर वो सभी नहाने के लिए वहा बनी सीढ़ियों से उतर कर नहाने के लिए नदी में उतर गए । नजाने फिर क्या कैसे हुआ एक एक कर के चारो उसीमे अंदर चलते चले गए फिर ऊपर नहीं आये । उस लड़के का इतना बयान लेकर पुलिस ने उसे जाने दिया और फिर से उस जगह और वहा आसपास फिर से छानबीन की । अभी भी उनके हाथ कुछ नहीं लगा । पुलिस ने सबको सिर्फ इतना बताया की चारो ने शराब पी हुई थी इसलिए वो तैर नहीं पाए और दुब गए , शराब की जाँच की गयी मगर वो ब्रांडेड शराब भी उसमे किसी असामान्य तत्त्व का होना मुश्किल था। मगर पुलिस अभी भी बेचैन थी वो लोगो दुब तो गए मगर लाश कहा गयी? उपाध्याय जी के घर में जो माहौल था उसका तो बखान करना ही मुश्किल है । जिसके ३ बेटे जो मर चुके हो लेकिन उसकी लास तक न मिली हो ऐसी माँ की क्या हालत होती है ये हर कोई समज सकता है । वो सुबह होते ही मन्नत मागंने मंदिर जाती, कभी कुछ कहती तो कभी कुछ नहीं कहती, कभी रोती तो कभी हंसती तो कभी चिल्लाते हुए बाहर भागने लगती ।

Real Ghost Stories in Hindi

आज तीसरा दिन था पूरा उपाध्याय परिवार उस दिन कोस ही रहा था और उन तीनो के मिल जाने की मन्नत कर रहा था । दोपहर के समय एक बाबा हमारी कॉलोनी में आया उस वकत उपाध्याय जी और उनका बेटा पुलिस स्टैशन गए हुए थे । माँ जी तो घर में सो रही थी , सोना क्या उसे तो गम की बेहोसी ही कहेंगे , एक दो रिश्तेदार भी घर में थे। घटना बहुत प्रचलित हो चुकी थी तो साधु ने पूरी घटना का बखान उनके आगे किया और फिर माता जी से कहा की “आपके तीन बेटे मिल जायेंगे मगर इसकी कीमत लगेगी क्योंकि वहा जो भी चीज़ है वो बहुत लालची है उसने ही तुम्हारे बेटो और दोस्तों को अपने पास रखा हुआ है मगर उनकी जान छुपा ली है उसे धन चाहिए फिर वो उनकी जान वापस उनके शरीर में दाल कर लोटा देगा ।” “किसी कीमत बाबाजी में हर कीमत देने को तैयार हु मगर मुझे मेंरे बेटे चाहिए ” माता जी ने उस बाबा से पूछा । ये सारी बात उन दोनों के बीच अकेले में चल रही थी क्योकि बाबा ने ही कहा था के ये बाट सिर्फ माता जी से करेगा ।” वो बहुत लालची आत्मा है इसलिए तुम्हारे पास जितना धन है सोना चांदी, लेकर वही गंगा के रेतीले घाट पर आ जाना । मगर आधी रात को एकेले आना के तुम्हारे घर में भी किसी को पता न चले । हम उस आत्मा को उतने ही धन में ही मानाने की कसिस करेंगे ।

और फिर तुम्हारे बेटे तुम्हे वापस मिल जायेंगे । अगर तुमने ये बात किसी को घर में बताई तो वो हमारी क्रिया में बाधा डाल देगा और फिर तुम अपने बेटो से हाथ धो बैठोगी । समज आया ?” बाबा ने माता जी से कहा । ” जी में बिलकुल समज गयी । ” आँखों में चमक लिए माता जी ने उस साधु से कहा । उन्हें अब उम्मीद की किरण नजर आ रही थी ।

जब रात हुई तो उन्होंने जल्दी खाना खा कर सोने का नाटक किया । उपाध्ययाय जी भी गहरी नींद में सोगए तो करीब पोने एक बजे वो उठी और पहले से तैयार की हुई अपने गहनों और रुपियो की पोटली को उठा कर चुपचाप घर से बहार निकल गयी और पोहुंच गयी उसी स्थान पर जहा उस बाबा ने बताया था । बेटो को पाने की खुशी में इतनी रात में भी उन्हें कोई दर नहीं लगा और सीधा वही पहुँच गयी । वह वो बाबा थोड़ी सी आग जलाकर और कुछ सिंदूर, निम्बू, सुइया , कला कपडा , थोड़े से चावल और अंडे लेकर बैठा कुछ पूजा पाठ जैसा केर रहा था । ” में ले आयी हु बाबा सारा धन , कृपया जल्दी से मुझे मेरे बेटो से मिलवादो । ” माता जी ने उस बाबा से कहा । फिर उसने सिंदूर से माता जी के चारो तरफ एक गोल वृत बना कर धन काले कपड़े में रखने को कहा । उन्होंने वैसा ही किया । फिर उसने कहा की “माता में ये निम्बू काटूंगा अगर इसमें से खून निकला तो मतलब आपके बेटे जिन्दा बचाये जा सख्ते है ।

फिर एक एक करके चार निम्बू कटे चारो में से खून निकला । माता जी सब कुछ शांत बैठकर देख रही थी । ” माता जी आपके चारो बेटो की जान सुरक्षित है अब ये धन आप इस वृत से बहार रख दीजिये और मन ही मन ये कहिये के यहाँ जो भी सकती वास करती हो, मेरे बेटे मुझे देदो । और तब तक आंख मत खोलना जब तक तुम्हारे बेटे आकर आवाज न दे । ” बाबा ने माता जी को ये बात समझाई। भोलीभाली बेटो के मोह में अंधी माता जी ने उस साधु की ये बात मान ली और जैसा उसने कहा वैसा ही मन ही मन जप करने लगी । उन्होंने इस बात का ७ बार किया होगा के अचानक उन्हें धम्म कुछ गिरने की आवाज आई । जिससे उनकी आँखों खुल गयी । साधु बाबा माता जी के सामने हाथ में धन की पोटली लिए गिरे पड़े थे और सामने एक लम्बा चौड़ा आदमी खड़ा था, जिसने सफ़ेद रंग की धोती और ऊपर एक सफ़ेद चादर सी ओढ़ राखी थी, इसके बाल कंधे तक थे , और दाढ़ी बड़ी ही डरावनी थी ।

और वो देखने में पहलवान जैसा दिख रहा था । और वो अचानक वहा आकर बोल ने लगा के मेरी जगह पर आकर मेरे ही नाम से धन की चोरी करता है वो भी उसका धन जो बैठे केर मेरा ही जप कर रही है । उस आदमी ने गरजते हुए साधु से कहा । साधु एक दम सा चौक गया और वो उस आदमी के सामने माफ़ी मांगने लगा “माफ़ करदो । मुझे माफ़ करदो मुझसे गलती हो गयी है दुबारा ऐसा नहीं होगा । ” साधु हाथ जोड़ते विनती कर ने लगा । ” नहीं! तु यहि भीख मांगेगा और मेरी हद में रोज सफाई करेंगा । ” उस आदमी ने उस साधु को डाटते हुए कहा । हां करूँगा सब करूँगा । मुझे माफ़ करदो मुझे कोई धन नहीं चाहिए , मुझे माफ़ करदो माता मुझे माफ़ करदो । वो गिड़गिड़ाए जा रहा था । और माता जी के समझ में ये आ चूका था ये साधु उन्हें लूटने आया आया था मगर ये नहीं समझ आया था की ये आदमी कौन है ? फिर उस आदमी ने उस साधु से वो पोटली छीन ली और फिर उसे माता जी को पोटली दे दिया और साधु को उठा कर एक तरफ फेक दिया साधु करीब ३ मीटर दूर जा गिरा और बेहोस हो गया ।

Pret Atma Ka Upkar Aur Dhongi Baba Real Ghost Stories in Hindi

कौन है आप ? और मेरे बेटे कहा है ? ” माता जी ने उस बलवान व्यक्ति से प्रश्न किया । ” में वही हु जिसका अभी तुम जप कर रही थी, मेने तुम्हारे बेटो की जान नहीं ली । वो तो खुद शराब के नसे में डूब गए और जहा डुबे थे वहा पर सीढिया बनी है उनकी लसो उसी सीढ़ियों के निचे फसी हुई है इसलिए वो किसी को नहीं मिल सकी ।” उस आदमी ने माता जी से कहा । मेरे बेटे मुझे लोटा दो , में जिनगी भर आपकी सेवा करुँगी ये सारा धन तुम रखलो । माता जी ने रोते हुए उस व्यक्ति के सामने हाथ जोड़कर विनती की । मुझे धन का कोई लाभ नहीं है माता , और तुमहरे बेटो की मृत्यु हो चुकी है वो भी उनकी ही गलती से अब वो वापस नहीं आ सख्ते । आप इस सत्य को अपना लो माता और अपने धन के साथ परिवार में वापस लौट जाओ । उस व्यक्ति ने माता जी को समजते हुए कहा । माता जी फुट फुट के रोने लगी उनकी सारी आस ख़तम हो गयी थी । फिर उस आदमी ने माता जी का आँचल पकड़ा जैसे कोई बच्चा पकड़ता है और उन्होंने अपने पीछे आने को कहा । वो रो रही थी और करीब दस कदम ही चली होंगी की वो अपने घर के दरवाजे के सामने थी । वो हैरान हो गयी और फिर पीछे मुड़ी और उस व्यक्ति से उसका परिचय पूछा । ” में वही का घटवार हु माता जिसका आप जाप करके मदद के लिए पुकार रही थी, में आपके बच्चो की ज़िंदगी को नहीं लोटा सकता मगर कल तुम्हारे स|रे बेटो की लाश वही मिल जाएँगी । अब आप अपने बचे हुए परिवार में खुश रहिये ।

व्यक्ति ने माता जी से कहा और फिर माता जी को अंदर जाने को कहा । माता जी दरवाजा खोल के अंदर गयी और पीछे मूड कर देखा तो वहा कोई नहीं था । मन ही मन घटवार की जय की और वापस अपनी जगह पर लेट कर रोने लगी । सुबह ४ बज रहे थे , उनके रोने की आवाज सुनकर उपाध्ययाय जी के आंख खुल गयी और फिर उन्होंने माता जी इतनी सुबह सुबह इस विलाप का कारण पूछा । माता जी ने सारी घटना सच सच बता दी । उपाध्याय जी को पहले विश्वाश ही नहीं हुआ फिर उन्होंने बात मन ली जब अगले दिन उनके तीनो बेटो की और उनके दोस्तों की लाश बरामद हो गयी । पुलिस ने लाश का की पोस्टमार्टम करवाया

मोत की वजह पानी में डूबना ही साबित हुयी । लाशो का अंतिम संस्कार हो गया और फिर सब कुछ सामान्य होने में ५ साल लग गए । उनका जो एक बेटा बचा था अब उसकी सादी हो चुकी है और घर में सब सामान्य है । उन्होंने घर बदल लिया है , लेकिन आज भी वो किसी भी पूजा में घटवार बाबा की जय कहे बिना पूजा नहीं करती ।

और आज भी ये कहानी हमारे छोटे से गांव में सब को याद है | वो कहानी जो कोई सुनता इसके रोंगटे खड़े हो जाते है । और वो कहानी तो में भूल ही नहीं सकता वो अभी भी मेरे दिमांग में गुम रही है। दोस्तों आशा करता हु की मेरी ये कहानी आपको जरूर पसंद आयी होगी दोस्तों हमें कोमेंट करके जरूर बताये।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *